top of page
Search

नागपंचमी

Updated: Jul 27, 2020

श्रावण शुक्ल पंचमी नागपंचमी होय. श्रावण शुक्ल पंचमी गीत नागपूजादि कृत्यांविषयी सूर्योदयापासून तीन मुहूर्त व्यापिनी असेल ती परत घ्यावी. नागपूजे विषयी पंचमी षष्ठीयुक्त करावी. कारण तिचे ठाई नाग संतुष्ट होतात. श्रावण महिन्यात शुक्ल पक्षी पंचमीस गृह द्वाराच्या दोन बाजूस गोमयाने भींत सारवून सर्प काढावे. दधि, दुर्वांकुर, कुश (दर्भ) , गंध पुष्प उपहार ब्राह्मणभोजन यांहीकरून यथाशास्त्र पूजन करावे. जो मनुष्य या पंचमी भक्तियुक्त नागपूजन करतील त्या सर्पापासून भय कोठेही होणार नाही.

नवनाग नावे अनंत, वासुकि,शेष, पद्मनाभ,कंबल,शंखपाल, धृतराष्ट्र तक्षक, कालिया.

 

श्री नवनाग स्तोत्र


अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलं

शन्खपालं ध्रूतराष्ट्रं च तक्षकं कालियं तथा

एतानि नव नामानि नागानाम च महात्मनं

सायमकाले पठेन्नीत्यं प्रातक्काले विशेषतः

तस्य विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत

ll इति श्री नवनागस्त्रोत्रं सम्पूर्णं ll

नाग गायत्री मंत्र 

ॐ नव कुलाय विध्महे विषदन्ताय धी माहि तन्नो सर्प प्रचोदयात ll

उत्तर प्रदेश की धर्म नगरी वाराणसी में एक ऐसा मशहूर कुंआ है, जिसे नागलोक का दरवाजा बताया जाता है। ऐसी मान्यता है कि नागपंचमी के दिन यहां दर्शन करने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है। यहां के नवापुरा नामक स्थान में स्थित कुएं बारे में मान्यता है कि कि इसकी गहराई पाताल और नागलोक को जोड़ती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहां आज भी नाग निवास करते हैं। नागकुंड स्थित इस कुएं का वर्णन शास्त्रों में किया गया है।


महर्षि पतंजलि के तप से हुआ था निर्माण


देश में तीन ऐसे ही कुंड हैं, जिनके बारे में कहा जाता है कि दर्शन करने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है। कहा जाता है कि जैतपुरा का कुंड ही मुख्य नागकुंड है। जिसका निर्माण महर्षि पतंजलि ने अपने तप से किया था। मान्यताओं के अनुसार, महर्षि पतंजलि ने एक शिवलिंग की भी स्थापना की थी। बताया जाता है कि नागपंचमी से पहले कुंड की सफाई कर जल निकाला जाता है और फिर शिवलिंग की विधि-विधान से पूजा-अर्चना होती है।

नागकुंड की गहराई-


इस जाने-माने स्थान को करकोटक नाग तीर्थ के नाम से जाना जाता है। बताया जाता है कि अभी तक नागकुंड की गहराई की सही जानकारी नहीं हो सकी है। कहा जाता है कालसर्प दोष से मुक्ति पाने का यह प्रथम स्थान है, जबकि दुनिया में ऐसे तीन स्थान हैं।


भगवान शिव के इस रूप की पूजा-

यहां भगवान शिव का एक प्राचीन मंदिर है। बताया जाता है कि भगवान शिव की पूजा यहां नागेश के रूप में होती है। भगवान शिव के इस स्वरूप की पूजा के कारण इस मंदिर को करकोटक नागेश्वर के नाम से जाते हैं।


नाग पंचमी: इस भूमि पर महाभारतकाल में भी रहा है नागों का विचरण


उत्तर प्रदेश के जनपद मुजफ्फरनगर की भूमि पर महाभारत काल में भी नागों का विचरण होता रहा है। शुकतीर्थ में महर्षि शुकदेव जी के श्रीमुख से पांडु पुत्र अर्जुन के पौत्र राजा परीक्षित को श्रीमद्भागवत कथा पृथ्वी पर पहली बार सुनाई गई थी। उसके पीछे भी श्रृंगी ऋषि का तक्षक नाग द्वारा राजा को सात दिन में डसने का श्राप ही कारण था। इसके अलावा शहर की सीमा पर शामली रोड पर स्थित पर्दाफाश मोती झील को नागलोक का रास्ता माना जाता है।

पुराणों में नागों का मूल स्थान पाताल लोक माना गया है। गरुड़ पुराण, भविष्य पुराण, चरक संहिता आदि में भी नागों का विस्तार से प्रसंग दिया गया है। भारतीय पुराणों में नागों की उत्पत्ति महर्षि कश्यप और उनकी पत्नी कद्रू से मानी गई है। भगवान विष्णु की शैया शेषनाग पर मानी गई तो भगवान शिव के गले में भी नाग ही पूजे जाते हैं।

इस पर उन्हें पर श्रृंगी ऋषि ने उन्हें श्राप दिया था कि उन्हें सात दिनों में तक्षक नाग डंस लेगा। इसके बाद तक्षक नाग के हाथों अपनी मृत्यु को निश्चित जानकर राजा परीक्षित ने शुक्रताल में महर्षि शुकदेव जी के श्रीमुख से श्रीमद्भागवत कथा सुनी। जिस वटवृक्ष के नीचे बैठकर महर्षि शुकदेव जी ने कथा सुनाई थी वह आज भी शुकदेव आश्रम में लाखों लोगों की आस्था का केंद्र हैं।  

शहर की पर्दाफाश मोती झील को माना जाता है नाग लोक का रास्ता मुजफ्फरनगर की सीमा पर शामली रोड पर कभी न सूखने वाली मोती झील को पर्दाफाश माना जाता है। इस झील का तल आज तक कोई पता नही लगा पाया है। बहुत पीढ़ियों से इस झील को नागलोक (पाताल लोक) का रास्ता भी माना जाता है। इस झील से कुछ दूरी पर नाग मंदिर (डल्लू देवता मंदिर) भी है जहां पर नाग पूजा होती है। नाग पंचमी पर दुग्धाभिषेक किया जाता है और बहुत बड़ा मेला लगता है।



 
 
 

Recent Posts

See All
AshtaSiddhi अष्टसिद्धि

AshtaSiddhi अष्टसिद्धि Siddhi In Indian religions, Siddhis  (Sanskrit: सिद्धि siddhi ; fulfillment, accomplishment) are material, paranormal, supernatural, or otherwise magical powers, abilities, and

 
 
 

Comments

Rated 0 out of 5 stars.
No ratings yet

Add a rating

©2025 

bottom of page
https://manage.wix.com/catalog-feed/v1/feed.tsv?marketplace=google&version=1&token=L6pyf%2F%2BCAsNOB5TcfltUWwm29a2SdYssSfYd%2BVC1LUyXMYQdHORi5DDXy48%2BwmbI&productsOnly=false