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अहिल्याबाई होल्कर जयंती ३१ मई २०२१

इस जानवर की वजह से अपने रथ से बेटे को मारना चाहती थीं महारानी अहिल्याबाई होल्कर


एक बार मध्य प्रदेश के इंदौर नगर में महारानी देवी अहिल्याबाई होल्कर के पुत्र मालोजीराव का रथ निकला तो उनके रास्ते में एक नवजात बछड़ा आ गया। गाय वहीं सड़क के किनारे बछड़े से कुछ दूर खड़ी थी। बछड़ा मालोरावजी के रथ की चपेट में आकर बुरी तरह जख्मी हो गया और वहीं उसकी मौत हो गई। मालोजीराव का रथ आगे निकल गया। गाय वहीं सड़क पर बछड़े के पास आकर बैठ गई।

थोड़ी देर बाद अहिल्याबाई वहां से गुजरीं। उन्होंने मृत बछड़े के पास बैठी गाय को देखा, तो उन्हें समझते देर न लगी कि किसी दुर्घटना में बछड़े की मौत हुई है। उन्होंने पता करवाया। सारा घटनाक्रम जानने पर अहिल्याबाई ने दरबार में मालोजी की पत्नी मेनावाई से पूछा, ‘यदि कोई व्यक्ति किसी मां के सामने उसके बेटे की हत्या कर दे, तो उसे क्या दंड मिलना चाहिए?’ मालोजी की पत्नी ने जवाब दिया, ‘उसे प्राणदंड मिलना चाहिए।’ अहिल्याबाई ने मालोराव को हाथ-पैर बांधकर सड़क पर डालने को कहा और फिर उन्होंने आदेश दिया कि मालोजी को रथ से टकराकर मृत्यु दंड दिया जाए। कोई भी सारथी यह कार्य करने को तैयार न था। अहिल्याबाई न्यायप्रिय थीं। कहते हैं, जब कोई सारथी आगे नहीं आया तो वह स्वयं इस कार्य के लिए रथ पर सवार हो गईं।

वह रथ को लेकर आगे बढ़ी ही थीं कि एक अप्रत्याशित घटना घटी। वही गाय रथ के सामने आकर खड़ी हो गई। उसे बार-बार हटाया जाता, लेकिन वह फिर रथ के सामने आकर खड़ी हो जाती। यह देखकर मंत्री ने महारानी से कहा, ‘शायद यह बेजुबान गाय भी नहीं चाहती कि किसी और मां के बेटे के साथ ऐसा हो। वह आपसे मालोजी के लिए दया की भीख मांग रही है।’ इंदौर में जिस जगह यह घटना घटी थी, वह स्थान आज भी ‘आड़ा बाजार’ के नाम से जाना जाता है।


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